Thursday, August 12, 2010

चिराग तुमने

चिराग तुमने तअस्सुब के क्या जलाए हैं
जिधर भी देखो अँधेरे- अँधेरे छाए हैं
तुम अपने शौक के हाथों का जाएज़ा लेना
किसी के आँख के सब खाब नोच लाये हैं



1 comment:

राणा प्रताप सिंह (Rana Pratap Singh) said...

बहुत खूब...बहुत सुन्दर